भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) ने हाल ही में जारी आँकड़ों में अपनी ताकत का शानदार प्रदर्शन किया है। अप्रैल से जून की पहली तिमाही में, भारत की GDP 7.8% की प्रभावशाली दर से बढ़ी है, जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और अन्य विश्लेषकों के अनुमानों से कहीं बेहतर है। RBI ने 6.5% की वृद्धि का अनुमान लगाया था, जबकि कई विश्लेषकों का अनुमान 6.7% के आसपास था।
यह मजबूत वृद्धि मुख्य रूप से घरेलू मांग और प्रमुख क्षेत्रों के शानदार प्रदर्शन का परिणाम है:
सेवा क्षेत्र: व्यापार, होटल, परिवहन और संचार जैसे सेवा क्षेत्रों ने 9.3% की महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की।
निर्माण और विनिर्माण: इन क्षेत्रों में भी 7.5% से अधिक की मजबूत वृद्धि देखी गई।
कृषि क्षेत्र: कृषि क्षेत्र में 3.7% की मजबूत वृद्धि हुई, जो पिछले साल की समान अवधि में केवल 1.5% थी।
सरकारी व्यय: सरकार के अंतिम उपभोग व्यय (Government Final Consumption Expenditure) में भी 9.7% की वृद्धि हुई, जिसने अर्थव्यवस्था को गति दी।
7.8% की वृद्धि के साथ, भारत अभी भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। इसी तिमाही में चीन की अर्थव्यवस्था 5.2% और अमेरिका की अर्थव्यवस्था 3.3% की दर से बढ़ी। यह आँकड़े दर्शाते हैं कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी आंतरिक शक्ति और लचीलेपन के कारण मजबूत बनी हुई है।
वित्त मंत्रालय ने इस वृद्धि को सही नीतियों और फैसलों का परिणाम बताया है। सरकार का कहना है कि यह विकास व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंच रहा है और जुलाई में पूर्ण बजट में 'विकसित भारत' के लिए एक विस्तृत रोडमैप पेश किया जाएगा।
हालाँकि, कुछ चुनौतियाँ भी सामने आई हैं। खनन और बिजली जैसे कुछ क्षेत्रों में वृद्धि की गति धीमी रही है, और निजी उपभोग (Private Final Consumption Expenditure) में भी थोड़ी कमी आई है, जो भविष्य के लिए चिंता का विषय हो सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह गति बनी रहती है, तो भारत आने वाले समय में भी सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना रहेगा।∎