एनएसए रद्द होने के बाद असम के विधायक अमीनुल इस्लाम ने मुख्यमंत्री हिमंत पर क्या टिप्पणी की?

अमीनुल इस्लाम (AIUDF विधायक) पर लगाया गया नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) गौहाटी हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया। कोर्ट के निर्देश के बाद, चूँकि उनके ख़िलाफ़ कोई अन्य मुक़दमा लंबित नहीं था, इसलिए उनकी रिहाई का आदेश दिया गया।

रिहा होने के बाद अमीनुल इस्लाम ने कहा, "यह मौजूदा बीजेपी सरकार की ज़्यादती है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ख़ुद को एक राजा समझते हैं. राज्य के एक डॉन की तरह वो जो चाहें, जब चाहें, जैसे चाहें, वैसा कर सकते हैं। बिना किसी वजह के, बिना किसी सही कारण के, उन्होंने 14 मई को मुझे एनएनए के तहत गिरफ्तार किया।”

उन्होंने कहा, “इससे पहले, पहलगाम हमले पर दिए मेरे बयान को लेकर मुझे नगांव सदर थाने में दर्ज एक केस में पकड़ा गया था। मेरे बयान की जांच के बाद, नगांव कोर्ट ने 15 दिनों के अंदर मुझे ज़मानत दे दी। लेकिन उसी दिन, राज्य सरकार ने मुझे रिहा करने से मना कर दिया और आदेश जारी किया कि मुझे एनएसए के तहत हिरासत में रखा जाए।"

"उनका कहना था कि अगर मैं बाहर आया तो ‘सामाजिक सौहार्द’ बिगड़ जाएगा। लेकिन यह सब सिर्फ़ सरकार की बदले की कार्रवाई थी, क्योंकि मैंने पिछले बजट सत्र में सरकार की कड़ी आलोचना की थी।"

विधायक इस्लाम ने गौहाटी हाई कोर्ट का भी आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा, “मैं गौहाटी हाई कोर्ट का आभारी हूं कि उन्होंने मुझे न्याय दिया परसों कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया कि मेरा डिटेंशन ऑर्डर ग़लत था, मुझे बिना किसी सही वजह के हिरासत में रखा गया था, और कोर्ट ने सरकार को तुरंत मुझे रिहा करने का आदेश दिया।"

दरअसल विधायक इस्लाम ने पहलगाम हमले के बाद बयान देते हुए कहा था कि ये हमला सरकार की साज़िश है। जिसके बाद उन्हें गिरफ़्तार किया गया था।∎