अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आने वाले सामान पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है। पहले से ही 25% शुल्क लागू है और अब 27 अगस्त से यह दोगुना होकर कुल 50% हो जाएगा। इस फैसले से भारतीय निर्यातकों के लिए अन्य देशों से मुकाबला करना और भी कठिन हो जाएगा।
लेकिन इस चुनौती का सामना करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेजी से कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। 15 अगस्त को लाल किले से अपने भाषण में मोदी ने बड़ा ऐलान किया कि सरकार जीएसटी सुधारों पर काम कर रही है। अभी जीएसटी में चार स्लैब हैं, लेकिन दो स्लैब हटाने की योजना बनाई गई है। इससे खासकर खाने-पीने की चीजें सस्ती होंगी और आम ग्राहकों को सीधा फायदा मिलेगा।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह चर्चा लंबे समय से चल रही थी, लेकिन अमेरिकी टैरिफ की वजह से अब सरकार सुधारों को जल्दी लागू करना चाहती है। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था में नई गति आएगी। लंबे समय से कारोबारी और अर्थशास्त्री मांग कर रहे थे कि फैसले लेने में तेजी लाई जाए। इसी को देखते हुए मोदी ने दो बड़ी समितियां बनाई हैं।
पहली समिति का नेतृत्व कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन कर रहे हैं, जो राज्यों में नियमों को आसान बनाने पर ध्यान देंगी। दूसरी समिति नीति आयोग के सदस्य राजीव गाबा की अगुवाई में है, जो अगली पीढ़ी के आर्थिक सुधारों के सुझाव तैयार करेगी। हाल ही में प्रधानमंत्री ने आर्थिक सलाहकार परिषद के साथ बैठक भी की, जिसमें अनुमान लगाया गया कि मार्च 2026 तक भारत 6.5% की विकास दर हासिल कर सकता है। कम महंगाई और ब्याज दरों में कटौती इस लक्ष्य को पाने में मदद करेगी।
फिलहाल भारत की अर्थव्यवस्था स्थिर मानी जा रही है। महंगाई 8 साल के सबसे निचले स्तर पर है और स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने 18 साल बाद भारत की क्रेडिट रेटिंग में सुधार किया है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल के मुताबिक यह सही समय है जब भारत तेजी से सुधार लागू कर सकता है और विकास की नई ऊँचाइयों को छू सकता है।
नोमुरा होल्डिंग्स की सोनल वर्मा का मानना है कि विदेशी निवेशकों के लिए नियम आसान करने, श्रम और भूमि कानूनों में ढील देने जैसे कदम ज़रूरी हैं। इसके साथ ही सरकार निर्यातकों को आर्थिक मदद देने पर भी विचार कर रही है, ताकि कपड़ा, गहने और जूते जैसे उद्योगों को राहत मिल सके।
भारत की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से घरेलू खपत पर आधारित है, जो जीडीपी का लगभग 60% हिस्सा है। यही वजह है कि सरकार लोगों और व्यापारियों का भरोसा बढ़ाने पर ध्यान दे रही है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाज़ार है। साल 2024 में भारत ने अमेरिका को 87.4 अरब डॉलर का माल भेजा, जो देश की जीडीपी का केवल 2% था।