भारतीय फिल्म संगीत जगत में जिन गायक-गायिकाओं ने अपनी अमिट छाप छोड़ी है, उनमें आशा भोंसले का नाम स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। आशा जी न केवल अपनी बहुमुखी प्रतिभा के लिए जानी जाती हैं, बल्कि उन्होंने सात दशकों से अधिक लंबे करियर में हर तरह के गीतों को अपनी आवाज़ से जीवंत किया है। रोमांटिक गीत, शास्त्रीय रचनाएँ, ग़ज़ल, भजन, पॉप और कैबरे—आशा जी ने हर विधा में अपनी अनूठी पहचान बनाई।
जन्म |
आशा मंगेशकर 8 सितंबर 1933 गोअर, सांगली , सांगली राज्य , ब्रिटिश भारत |
व्यवसायों |
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सक्रिय वर्ष |
1943–वर्तमान |
जीवनसाथी |
गणपतराव भोसले (मृत्यु 1949; सितम्बर 1960) आर.डी. बर्मन ( विवाह 1980; मृत्यु 1994 ) |
बच्चे |
3 |
पिता |
दीनानाथ मंगेशकर |
परिवार |
मंगेशकर परिवार और माणिक्य वंश (ससुराल) |
पुरस्कार सम्मान |
दादा साहब फाल्के पुरस्कार (2000) पद्म विभूषण (2008) बंगा विभूषण (2018) महाराष्ट्र भूषण (2021) |
आशा भोंसले का जन्म 8 सितम्बर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली में हुआ था। वे प्रसिद्ध गायक और अभिनेता पंडित दीनानाथ मंगेशकर की पुत्री तथा सुर कोकिला लता मंगेशकर की छोटी बहन हैं। बचपन से ही उन्हें संगीत की शिक्षा अपने पिता से मिली। जब उनके पिता का देहांत हुआ, तब आशा मात्र 9 वर्ष की थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति संभालने के लिए उन्हें और लता जी को फिल्मों में गाने का अवसर तलाशना पड़ा।
आशा भोंसले ने 1943 में मराठी फिल्म माझा बल से गाने की शुरुआत की। हिंदी फिल्मों में उनका पहला बड़ा ब्रेक फिल्म चुनरिया (1948) से मिला। शुरुआती दौर में उन्हें छोटे-मोटे गाने गाने पड़े, लेकिन वे धीरे-धीरे अपनी प्रतिभा के बल पर आगे बढ़ीं। 1950 और 60 के दशक में ओ. पी. नैयर, आर. डी. बर्मन और शंकर-जयकिशन जैसे संगीतकारों ने उन्हें मुख्यधारा में स्थापित किया।
आशा जी की सबसे बड़ी खासियत उनकी बहुमुखी प्रतिभा है। उन्होंने शास्त्रीय संगीत पर आधारित गीतों से लेकर हल्के-फुल्के नृत्य गीतों तक सबकुछ गाया। उनका गाना “आइये मेहरबान” (फिल्म: हावड़ा ब्रिज), “पिया तू अब तो आजा” (फिल्म: कारवां) और “दम मारो दम” (फिल्म: हरे रामा हरे कृष्णा) आज भी अमर हैं। आर. डी. बर्मन के साथ उनकी जोड़ी ने कई अविस्मरणीय गाने दिए।
आशा भोंसले ने हजारों गीत गाए हैं और गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में सबसे अधिक गाने रिकॉर्ड करने वाली गायिका के रूप में दर्ज हुईं। उन्हें कई फिल्मफेयर अवार्ड्स और राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले। 2008 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
आशा जी ने केवल भारतीय फिल्मों में ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई। उन्होंने ग़ज़ल गायक गुलाम अली, ब्रिटिश बैंड Cornershop और कई विदेशी कलाकारों के साथ सहयोग किया। उनकी आवाज़ ने भारतीय संगीत को विश्वभर में लोकप्रिय बनाने में योगदान दिया।
आशा भोंसले का विवाह बहुत कम उम्र में गणपत राव भोंसले से हुआ था, लेकिन यह संबंध ज्यादा समय तक नहीं टिक पाया। बाद में उन्होंने संगीतकार आर. डी. बर्मन से विवाह किया, जिनके साथ उनकी जोड़ी व्यक्तिगत और पेशेवर दोनों ही स्तर पर बेहद सफल रही।
आशा भोंसले केवल एक गायिका नहीं बल्कि भारतीय संगीत की जीवित किंवदंती हैं। उनकी आवाज़ पीढ़ियों को जोड़ती है और आज भी नए गायक-गायिकाओं के लिए प्रेरणा बनी हुई है। वे इस बात का प्रतीक हैं कि मेहनत, जुनून और कला के प्रति समर्पण से कोई भी असीम ऊँचाइयाँ छू सकता है।