कपिल सिब्बल भारतीय राजनीति और न्यायिक व्यवस्था का एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने अपने विचारों, ज्ञान और अनुभव से देश की दिशा और दशा को प्रभावित किया है। वे एक प्रसिद्ध वकील, शिक्षाविद्, और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रह चुके हैं। हाल ही में वे कांग्रेस छोड़कर अपनी नई राजनीतिक यात्रा की ओर अग्रसर हुए हैं।
जन्म |
8 अगस्त 1948 जालंधर , पूर्वी पंजाब , भारत |
राजनीतिक दल |
स्वतंत्र |
अन्य राजनीतिक संबद्धताएँ |
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (2003 से 18 मई 2022) |
जीवन साथी |
नीना सिब्बल ( विवाह 1973; मृत्यु 2000) प्रोमिला सिब्बल ( एम.2005) |
बच्चे |
अमित सिब्बल, अखिल सिब्बल |
माता-पिता |
हीरा लाल सिब्बल (पिता) |
रिश्तेदार |
कंवल सिब्बल (भाई) |
अल्मा मेटर |
सेंट स्टीफन कॉलेज, दिल्ली ( बीए , एमए ) विधि संकाय, दिल्ली विश्वविद्यालय ( एलएलबी ) हार्वर्ड लॉ स्कूल ( एलएलएम ) |
पेशा |
वरिष्ठ अधिवक्ता राजनीतिज्ञ |
कपिल सिब्बल का जन्म 8 अगस्त 1948 को उत्तर प्रदेश के जालंधर में हुआ था। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से बी.ए. (ऑनर्स) और एलएल.बी. की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद वे अमेरिका चले गए जहां उन्होंने हार्वर्ड लॉ स्कूल से एलएल.एम. की डिग्री प्राप्त की। उनकी शिक्षा में गहराई और अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण ने उन्हें एक सशक्त विधिवेत्ता बनने में सहायता की।
कपिल सिब्बल भारत के सर्वोच्च न्यायालय के एक वरिष्ठ वकील हैं। वे 1983 में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता बने और 1992 में भारत के अटॉर्नी जनरल के पद के लिए चुने गए। उन्होंने कई संवैधानिक मामलों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वे कई बार न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच संतुलन बनाने वाले मुकदमों में मुखर रूप से सामने आए।
कपिल सिब्बल ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से की थी। वे राज्यसभा और लोकसभा दोनों में सांसद रह चुके हैं। उन्होंने केंद्र सरकार में कई महत्त्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला, जिनमें मानव संसाधन विकास मंत्रालय, संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय आदि शामिल हैं।
सिब्बल ने शिक्षा नीति, सूचना क्रांति और तकनीकी विकास के क्षेत्र में कई नीतिगत बदलाव किए। उनका भाषण शैली में प्रभावशाली होना और तर्कों से विरोधियों को घेरना उन्हें एक विशिष्ट पहचान देता है।
2022 में कपिल सिब्बल ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दिया और समाजवादी पार्टी के समर्थन से राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया। उन्होंने "इंडियन सेक्युलर फ्रंट" नामक एक नए राजनीतिक मंच की नींव भी रखी, जो भाजपा विरोधी दलों को एकजुट करने की दिशा में काम कर रहा है।
कपिल सिब्बल एक लेखक और कवि भी हैं। उन्होंने कई कविताएँ और लेख लिखे हैं जो राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को उजागर करते हैं। वे कला और साहित्य के भी प्रेमी माने जाते हैं।
कपिल सिब्बल भारतीय राजनीति और विधि जगत का एक जाना-माना चेहरा हैं। उनके विचार, निर्णय और वक्तव्य सदैव चर्चा का विषय रहे हैं। चाहे वह अदालत में दलीलें हों या संसद में बहस — उन्होंने हमेशा तथ्यों और न्याय का पक्ष लिया है। आज जब वे एक नई राजनीतिक यात्रा की ओर बढ़ रहे हैं, तो देश की जनता की नजरें फिर एक बार उनके योगदान की ओर लगी हुई हैं।